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वीरेंद्र सहवाग दुनिया भर के गेंदबाजों के लिए आतंक का पर्याय बन चुके हैं। सहवाग जब क्रीज पर रहते हैं, तब तक विरोधियों के माथे पर उनकी क्रीज पर मौजूदगी का खौफ साफ-साफ देखा जा सकता है। तेज गेंदबाजी आक्रमण हो या स्पिन सहवाग अगर अपने रंग में होते हैं तो किसी को नहीं बख्शते हैं। नजफगढ़ के नवाब सहवाग पहला अंतरराष्ट्रीय मैच 1999 में पाकिस्तान के खिलाफ खेला था। इस मैच में सहवाग एक रन बनाकर चलते बने और गेंदबाजी के दौरान तीन ओवरों में 35 रन दे डाले। इसके बाद सहवाग को काफी समय तक टीम में शामिल नहीं किया गया। जिंबाब्वे के खिलाफ घरेलू सीरीज में दिसंबर 2000 में सहवाग को फिर से टीम में शामिल किया गया। अगस्त 2001 में श्रीलंका और न्यूजीलैंड के खिलाफ ट्राई सीरीज में सहवाग ने पारी की शुरुआत करते हुए करियर का पहला अर्धशतक जमाया। इसी सीरीज में न्यूजीलैंड के खिलाफ 69 रनों पर शतक ठोककर सहवाग ने अपने हुनर का नमूना पेश किया। सहवाग क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर को अपना मार्गदर्शक मानते हैं। सहवाग एकमात्र ऐसे भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने टेस्ट मैच में तिहरा शतक जड़ा है। विश्व कप के दौरान सहवाग के कंधों पर गौतम गंभीर के साथ मिलकर टीम को शानदार शुरुआत देने की जिम्मेदारी होगी।